श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.10.52

नवम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

त्रेतायां वर्तमानायां कालः कृतसमोऽभवत्।

रामे राजनि धर्मज्ञे सर्वभूतसुखावहे॥ ५२

tretāyāṃ vartamānāyāṃ kālaḥ kṛtasamo'bhavat|

rāme rājani dharmajñe sarvabhūtasukhāvahe|| 52

अर्थ

परीक्षित्! जब समस्त प्राणियोंको सुख देनेवाले परम धर्मज्ञ भगवान् श्रीराम राजा हुए तब था तो त्रेतायुग, परन्तु मालूम होता था मानो सत्ययुग ही है॥ ५२॥✎ 1640

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1640 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: सती-शिरोमणि → सतीशिरोमणि

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