उसमें प्रवेश करते ही वीरवर सुद्युम्नने देखा कि मैं स्त्री हो गया हूँ और घोड़ा घोड़ी हो गया है॥ २६॥
तस्मिन् प्रविष्ट एवासौ सुद्युम्नः परवीरहा।
अपश्यत् स्त्रियमात्मानमश्वं च वडवां नृप॥ २६
उसमें प्रवेश करते ही वीरवर सुद्युम्नने देखा कि मैं स्त्री हो गया हूँ और घोड़ा घोड़ी हो गया है॥ २६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.1.26 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 9) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/1/26/