श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.1.26

नवम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

तस्मिन् प्रविष्ट एवासौ सुद्युम्‍नः परवीरहा।

अपश्यत् स्त्रियमात्मानमश्‍वं च वडवां नृप॥ २६

tasmin praviṣṭa evāsau sudyumnaḥ paravīrahā|

apaśyat striyamātmānamaśvaṃ ca vaḍavāṃ nṛpa|| 26

अर्थ

उसमें प्रवेश करते ही वीरवर सुद्युम्‍नने देखा कि मैं स्त्री हो गया हूँ और घोड़ा घोड़ी हो गया है॥ २६॥

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