वीर सुद्युम्न कवच पहनकर और हाथमें सुन्दर धनुष एवं अत्यन्त अद्भुत बाण लेकर हरिनोंका पीछा करते हुए उत्तर दिशामें बहुत आगे बढ़ गये॥ २४॥
प्रगृह्य रुचिरं चापं शरांश्च परमाद्भुतान्।
दंशितोऽनुमृगं वीरो जगाम दिशमुत्तराम्॥ २४
वीर सुद्युम्न कवच पहनकर और हाथमें सुन्दर धनुष एवं अत्यन्त अद्भुत बाण लेकर हरिनोंका पीछा करते हुए उत्तर दिशामें बहुत आगे बढ़ गये॥ २४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.1.24 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 9) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/1/24/