श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.1.16

नवम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

होतुस्तद‍्व्यभिचारेण कन्येला नाम साभवत्।

तां विलोक्य मनुः प्राह नातिहृष्टमना गुरुम्॥ १६

hotustadvyabhicāreṇa kanyelā nāma sābhavat|

tāṃ vilokya manuḥ prāha nātihṛṣṭamanā gurum|| 16

अर्थ

जब होताने इस प्रकार विपरीत कर्म किया, तब यज्ञके फलस्वरूप पुत्रके स्थानपर इला नामकी कन्या हुई। उसे देखकर श्राद्धदेव मनुका मन कुछ विशेष प्रसन्‍न नहीं हुआ। उन्होंने अपने गुरु वसिष्ठजीसे कहा—॥ १६॥

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