वैवस्वत मनु पहले सन्तानहीन थे। उस समय सर्वसमर्थ भगवान् वसिष्ठने उन्हें सन्तानप्राप्ति करानेके लिये मित्रावरुणका यज्ञ कराया था॥ १३॥
अप्रजस्य मनोः पूर्वं वसिष्ठो भगवान् किल।
मित्रावरुणयोरिष्टिं प्रजार्थमकरोत् प्रभुः॥ १३
वैवस्वत मनु पहले सन्तानहीन थे। उस समय सर्वसमर्थ भगवान् वसिष्ठने उन्हें सन्तानप्राप्ति करानेके लिये मित्रावरुणका यज्ञ कराया था॥ १३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 9.1.13 · गीताप्रेस, गोरखपुर (द्वितीय खण्ड, पृष्ठ 8) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/9/1/13/