श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 9.1.11

नवम स्कन्ध · अध्याय 1 · अथ प्रथमोऽध्यायः

ततो मनुः श्राद्धदेवः संज्ञायामास भारत।

श्रद्धायां जनयामास दश पुत्रान् स आत्मवान्॥ ११

tato manuḥ śrāddhadevaḥ saṃjñāyāmāsa bhārata|

śraddhāyāṃ janayāmāsa daśa putrān sa ātmavān|| 11

अर्थ

विवस्वान्की संज्ञा नामक पत्‍नीसे श्राद्धदेव मनुका जन्म हुआ। परीक्षित्! परम मनस्वी राजा श्राद्धदेवने अपनी पत्‍नी श्रद्धाके गर्भसे दस पुत्र उत्पन्‍न किये। उनके नाम थे—इक्ष्वाकु, नृग, शर्याति, दिष्ट, धृष्ट, करूष, नरिष्यन्त, पृषध्र, नभग और कवि॥ ११-१२॥

यह अर्थ श्लोक 11–12 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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