इसके बाद एक दिनका उपवास करके सबने स्नान किया। हविष्यसे अग्निमें हवन किया। गौ, ब्राह्मण और समस्त प्राणियोंको घास-चारा, अन्न-धनादिका यथायोग्य दान दिया तथा ब्राह्मणोंसे स्वस्त्ययन कराया॥ १४॥✎ 719720
अथोपोष्य कृतस्नाना हुत्वा च हविषानलम्।
दत्त्वा गोविप्रभूतेभ्यः कृतस्वस्त्ययना द्विजैः॥ १४
इसके बाद एक दिनका उपवास करके सबने स्नान किया। हविष्यसे अग्निमें हवन किया। गौ, ब्राह्मण और समस्त प्राणियोंको घास-चारा, अन्न-धनादिका यथायोग्य दान दिया तथा ब्राह्मणोंसे स्वस्त्ययन कराया॥ १४॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.9.14 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 949) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/9/14/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)