श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.6.9

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 6 · अथ षष्ठोऽध्यायः

रूपं तवैतत् पुरुषर्षभेज्यं

श्रेयोऽर्थिभिर्वैदिकतान्त्रिकेण ।

योगेन धातः सह नस्त्रिलोकान्

पश्याम्यमुष्मिन् नु ह विश्‍वमूर्तौ॥ ९

rūpaṃ tavaitat puruṣarṣabhejyaṃ

śreyo'rthibhirvaidikatāntrikeṇa |

yogena dhātaḥ saha nastrilokān

paśyāmyamuṣmin nu ha viśvamūrtau|| 9

अर्थ

पुरुषोत्तम! अपना कल्याण चाहनेवाले साधक वेदोक्त एवं पांचरात्रोक्त विधिसे आपके इसी स्वरूपकी उपासना करते हैं। मुझे भी रचनेवाले प्रभो! आपके इस विश्‍वमय स्वरूपमें मुझे समस्त देवगणोंके सहित तीनों लोक दिखायी दे रहे हैं॥ ९॥

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