इसके बाद देवतालोग बलिके पास पहुँचे। बलिने तीनों लोकोंको जीत लिया था। वे समस्त सम्पत्तियोंसे सेवित एवं असुरसेनापतियोंसे सुरक्षित होकर अपने राजसिंहासनपर बैठे हुए थे॥ २९॥✎ 694
ते वैरोचनिमासीनं गुप्तं चासुरयूथपैः।
श्रिया परमया जुष्टं जिताशेषमुपागमन्॥ २९
इसके बाद देवतालोग बलिके पास पहुँचे। बलिने तीनों लोकोंको जीत लिया था। वे समस्त सम्पत्तियोंसे सेवित एवं असुरसेनापतियोंसे सुरक्षित होकर अपने राजसिंहासनपर बैठे हुए थे॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.6.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 933) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/6/29/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)