nāpaśyankhaṃ diśaḥ kṣoṇimātmānaṃ ca kuto vibhum|| 2
अर्थ
भगवान्की उस प्रभासे सभी देवताओंकी आँखें चौंधिया गयीं। वे भगवान्को तो क्या—आकाश, दिशाएँ, पृथ्वी और अपने शरीरको भी न देख सके॥ २॥✎ 6896902031
तेनैव महसा सर्वे देवाः प्रतिहतेक्षणाः।
नापश्यन्खं दिशः क्षोणिमात्मानं च कुतो विभुम्॥ २
भगवान्की उस प्रभासे सभी देवताओंकी आँखें चौंधिया गयीं। वे भगवान्को तो क्या—आकाश, दिशाएँ, पृथ्वी और अपने शरीरको भी न देख सके॥ २॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.6.2 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 929) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/6/2/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)