श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.3.5

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 3 · अथ तृतीयोऽध्यायः

कालेन पञ्चत्वमितेषु कृत्स्नशो

लोकेषु पालेषु च सर्वहेतुषु।

तमस्तदाऽऽसीद् गहनं गभीरं

यस्तस्य पारेऽभिविराजते विभुः॥ ५

kālena pañcatvamiteṣu kṛtsnaśo

lokeṣu pāleṣu ca sarvahetuṣu|

tamastadā''sīd gahanaṃ gabhīraṃ

yastasya pāre'bhivirājate vibhuḥ|| 5

अर्थ

प्रलयके समय लोक, लोकपाल और इन सबके कारण सम्पूर्णरूपसे नष्ट हो जाते हैं। उस समय केवल अत्यन्त घना और गहरा अन्धकार-ही-अन्धकार रहता है। परन्तु अनन्त परमात्मा उससे सर्वथा परे विराजमान रहते हैं। वे ही प्रभु मेरी रक्षा करें॥ ५॥✎ 661 662

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #661 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #662 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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