तब राजाने भगवान्की आज्ञाका स्मरण किया और देखा कि नाव भी आ गयी है। तब वे धान्य तथा अन्य बीजोंको लेकर सप्तर्षियोंके साथ उसपर सवार हो गये॥ ४२॥✎ 838
ध्यायन् भगवदादेशं ददृशे नावमागताम्।
तामारुरोह विप्रेन्द्रैरादायोषधिवीरुधः॥ ४२
तब राजाने भगवान्की आज्ञाका स्मरण किया और देखा कि नाव भी आ गयी है। तब वे धान्य तथा अन्य बीजोंको लेकर सप्तर्षियोंके साथ उसपर सवार हो गये॥ ४२॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.24.42 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1018) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/24/42/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)