श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.24.42

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

ध्यायन् भगवदादेशं ददृशे नावमागताम्।

तामारुरोह विप्रेन्द्रैरादायोषधिवीरुधः॥ ४२

dhyāyan bhagavadādeśaṃ dadṛśe nāvamāgatām|

tāmāruroha viprendrairādāyoṣadhivīrudhaḥ|| 42

अर्थ

तब राजाने भगवान्‌की आज्ञाका स्मरण किया और देखा कि नाव भी आ गयी है। तब वे धान्य तथा अन्य बीजोंको लेकर सप्तर्षियोंके साथ उसपर सवार हो गये॥ ४२॥✎ 838

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #838 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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