श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.24.41

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

ततः समुद्र उद्वेलः सर्वतः प्लावयन् महीम्।

वर्धमानो महामेघैर्वर्षद्भिः समदृश्यत॥ ४१

tataḥ samudra udvelaḥ sarvataḥ plāvayan mahīm|

vardhamāno mahāmeghairvarṣadbhiḥ samadṛśyata|| 41

अर्थ

इतनेमें ही भगवान्‌का बताया हुआ वह समय आ पहुँचा। राजाने देखा कि समुद्र अपनी मर्यादा छोड़कर बढ़ रहा है। प्रलयकालके भयङ्कर मेघ वर्षा करने लगे। देखते-ही-देखते सारी पृथ्वी डूबने लगी॥ ४१॥✎ 838

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #838 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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