श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.24.39

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 24 · अथ चतुर्विंशोऽध्यायः

इत्थमादिश्य राजानं हरिरन्तरधीयत।

सोऽन्ववैक्षत तं कालं यं हृषीकेश आदिशत्॥ ३९

itthamādiśya rājānaṃ harirantaradhīyata|

so'nvavaikṣata taṃ kālaṃ yaṃ hṛṣīkeśa ādiśat|| 39

अर्थ

भगवान् राजा सत्यव्रतको यह आदेश देकर अन्तर्धान हो गये। अतः अब राजा सत्यव्रत उसी समयकी प्रतीक्षा करने लगे, जिसके लिये भगवान्‌ने आज्ञा दी थी॥ ३९॥✎ 837

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #837 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें