श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.23.20

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 23 · अथ त्रयोविंशोऽध्यायः

प्रजापतिपतिर्ब्रह्मा देवर्षिपितृभूमिपैः।

दक्षभृग्वङ्गिरोमुख्यैः कुमारेण भवेन च॥ २०

prajāpatipatirbrahmā devarṣipitṛbhūmipaiḥ|

dakṣabhṛgvaṅgiromukhyaiḥ kumāreṇa bhavena ca|| 20

अर्थ

इसके बाद प्रजापतियोंके स्वामी ब्रह्माजीने देवर्षि, पितर, मनु, दक्ष, भृगु, अंगिरा, सनत्कुमार और शंकरजीके साथ कश्यप एवं अदितिकी प्रसन्‍नताके लिये तथा सम्पूर्ण प्राणियोंके अभ्युदयके लिये समस्त लोक और लोकपालोंके स्वामीके पदपर वामनभगवान्‌का अभिषेक कर दिया॥ २०-२१॥✎ 823

यह अर्थ श्लोक 20–21 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #823 शब्दोंके बीचका स्थान: वामनभगवान् ने → वामनभगवान्‌ने

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