परीक्षित्! इस प्रकार वामनभगवान्ने बलिसे पृथ्वीकी भिक्षा माँगकर अपने बड़े भाई इन्द्रको स्वर्गका राज्य दिया, जिसे उनके शत्रुओंने छीन लिया था॥ १९॥✎ 823
एवं बलेर्महीं राजन् भिक्षित्वा वामनो हरिः।
ददौ भ्रात्रे महेन्द्राय त्रिदिवं यत् परैर्हृतम्॥ १९
परीक्षित्! इस प्रकार वामनभगवान्ने बलिसे पृथ्वीकी भिक्षा माँगकर अपने बड़े भाई इन्द्रको स्वर्गका राज्य दिया, जिसे उनके शत्रुओंने छीन लिया था॥ १९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.23.19 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 1013) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/23/19/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
#823 शब्दोंके बीचका स्थान: वामनभगवान् ने → वामनभगवान्ने