श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.20.29

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 20 · अथ विंशोऽध्यायः

नदीश्‍च नाडीषु शिला नखेषु

बुद्धावजं देवगणानृषींश्‍च।

प्राणेषु गात्रे स्थिरजङ्गमानि

सर्वाणि भूतानि ददर्श वीरः॥ २९

nadīśca nāḍīṣu śilā nakheṣu

buddhāvajaṃ devagaṇānṛṣīṃśca|

prāṇeṣu gātre sthirajaṅgamāni

sarvāṇi bhūtāni dadarśa vīraḥ|| 29

अर्थ

उनकी नाड़ियोंमें नदियाँ, नखोंमें शिलाएँ और बुद्धिमें ब्रह्मा, देवता एवं ऋषिगण दीख पड़े। इस प्रकार वीरवर बलिने भगवान्‌की इन्द्रियों और शरीरमें सभी चराचर प्राणियोंका दर्शन किया॥ २९॥✎ 798 2037

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #798 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #2037 यूनिकोड-रूप (अक्षर वही): डि़ → ड़ि

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