श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.2.19

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 2 · अथ द्वितीयोऽध्यायः

मल्लिकाशतपत्रैश्‍च माधवीजालकादिभिः।

शोभितं तीरजैश्चान्यैर्नित्यर्तुभिरलं द्रुमैः॥ १९

mallikāśatapatraiśca mādhavījālakādibhiḥ|

śobhitaṃ tīrajaiścānyairnityartubhiralaṃ drumaiḥ|| 19

अर्थ

कुन्द, कुरबक (कटसरैया), अशोक, सिरस, वनमल्लिका, लिसौड़ा, हरसिंगार, सोनजूही, नाग, पुन्‍नाग, जाती, मल्लिका, शतपत्र, माधवी और मोगरा आदि सुन्दर-सुन्दर पुष्पवृक्ष एवं तटके दूसरे वृक्षोंसे भी—जो प्रत्येक ऋतुमें हरे-भरे रहते थे—वह सरोवर शोभायमान रहता था॥ १८-१९॥

यह अर्थ श्लोक 18–19 का एक साथ है, जैसा मुद्रित ग्रन्थमें।

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