श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.19.29

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

विष्णवे क्ष्मां प्रदास्यन्तमुशना असुरेश्‍वरम्।

जानंश्चिकीर्षितं विष्णोः शिष्यं प्राह विदां वरः॥ २९

viṣṇave kṣmāṃ pradāsyantamuśanā asureśvaram|

jānaṃścikīrṣitaṃ viṣṇoḥ śiṣyaṃ prāha vidāṃ varaḥ|| 29

अर्थ

शुक्राचार्यजी सब कुछ जानते थे। उनसे भगवान्‌की यह लीला भी छिपी नहीं थी। उन्होंने राजा बलिको पृथ्वी देनेके लिये तैयार देखकर उनसे कहा॥ २९॥✎ 795 796

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #795 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #796 शब्दोंके बीचका स्थान: वामनभगवान् को → वामनभगवान्‌को

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