श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.19.18

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 19 · अथैकोनविंशोऽध्यायः

बलिरुवाच

अहो ब्राह्मणदायाद वाचस्ते वृद्धसंमताः।

त्वं बालो बालिशमतिः स्वार्थं प्रत्यबुधो यथा॥ १८

aho brāhmaṇadāyāda vācaste vṛddhasaṃmatāḥ|

tvaṃ bālo bāliśamatiḥ svārthaṃ pratyabudho yathā|| 18

अर्थ

राजा बलिने कहा—ब्राह्मणकुमार! तुम्हारी बातें तो वृद्धों-जैसी हैं, परन्तु तुम्हारी बुद्धि अभी बच्चोंकी-सी ही है। अभी तुम हो भी तो बालक ही न, इसीसे अपना हानि-लाभ नहीं समझ रहे हो॥ १८॥✎ 1627

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1627 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: द्वीप-का-द्वीप → द्वीपका-द्वीप

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