॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.18.9
सिद्धविद्याधरगणाः सकिम्पुरुषकिन्नराः।
चारणा यक्षरक्षांसि सुपर्णा भुजगोत्तमाः॥ ९
siddhavidyādharagaṇāḥ sakimpuruṣakinnarāḥ|
cāraṇā yakṣarakṣāṃsi suparṇā bhujagottamāḥ|| 9
अर्थ
सिद्ध, विद्याधर, किम्पुरुष, किन्नर, चारण, यक्ष, राक्षस, पक्षी, मुख्य-मुख्य नागगण और देवताओंके अनुचर नाचने-गाने एवं भूरि-भूरि प्रशंसा करने लगे तथा उन लोगोंने अदितिके आश्रमको पुष्पोंकी वर्षासे ढक दिया॥ ९-१०॥