श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.18.7

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

शङ्खदुन्दुभयो नेदुर्मृदङ्गपणवानकाः।

चित्रवादित्रतूर्याणां निर्घोषस्तुमुलोऽभवत्॥ ७

śaṅkhadundubhayo nedurmṛdaṅgapaṇavānakāḥ|

citravāditratūryāṇāṃ nirghoṣastumulo'bhavat|| 7

अर्थ

भगवान्‌के अवतारके समय शंख, ढोल, मृदंग, डफ और नगाड़े आदि बाजे बजने लगे। इन तरह-तरहके बाजों और तुरहियोंकी तुमुल ध्वनि होने लगी॥ ७॥✎ 779

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #779 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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