॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.18.7
शङ्खदुन्दुभयो नेदुर्मृदङ्गपणवानकाः।
चित्रवादित्रतूर्याणां निर्घोषस्तुमुलोऽभवत्॥ ७
śaṅkhadundubhayo nedurmṛdaṅgapaṇavānakāḥ|
citravāditratūryāṇāṃ nirghoṣastumulo'bhavat|| 7
अर्थ
भगवान्के अवतारके समय शंख, ढोल, मृदंग, डफ और नगाड़े आदि बाजे बजने लगे। इन तरह-तरहके बाजों और तुरहियोंकी तुमुल ध्वनि होने लगी॥ ७॥✎ 779