श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.18.6

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

द्वादश्यां सवितातिष्ठन्मध्यंदिनगतो नृप।

विजया नाम सा प्रोक्ता यस्यां जन्म विदुर्हरेः॥ ६

dvādaśyāṃ savitātiṣṭhanmadhyaṃdinagato nṛpa|

vijayā nāma sā proktā yasyāṃ janma vidurhareḥ|| 6

अर्थ

परीक्षित्! जिस तिथिमें भगवान्‌का जन्म हुआ था, उसे ‘विजया द्वादशी’ कहते हैं। जन्मके समय सूर्य आकाशके मध्यभागमें स्थित थे॥ ६॥✎ 779

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #779 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने

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