इस रीतिसे जब वामनभगवान्का उपनयन-संस्कार हुआ, तब यक्षराज कुबेरने उनको भिक्षाका पात्र और सतीशिरोमणि जगज्जननी स्वयं भगवती उमाने भिक्षा दी॥ १७॥✎ 7827831626
तस्मा इत्युपनीताय यक्षराट् पात्रिकामदात्।
भिक्षां भगवती साक्षादुमादादम्बिका सती॥ १७
इस रीतिसे जब वामनभगवान्का उपनयन-संस्कार हुआ, तब यक्षराज कुबेरने उनको भिक्षाका पात्र और सतीशिरोमणि जगज्जननी स्वयं भगवती उमाने भिक्षा दी॥ १७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.18.17 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 990) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/18/17/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)