श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.18.13

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 18 · अथाष्टादशोऽध्यायः

तं वटुं वामनं दृष्ट्वा मोदमाना महर्षयः।

कर्माणि कारयामासुः पुरस्कृत्य प्रजापतिम्॥ १३

taṃ vaṭuṃ vāmanaṃ dṛṣṭvā modamānā maharṣayaḥ|

karmāṇi kārayāmāsuḥ puraskṛtya prajāpatim|| 13

अर्थ

भगवान्‌को वामन ब्रह्मचारीके रूपमें देखकर महर्षियोंको बड़ा आनन्द हुआ। उन लोगोंने कश्यप प्रजापतिको आगे करके उनके जातकर्म आदि संस्कार करवाये॥ १३॥✎ 782 783 1626

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (3)
  • #782 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को
  • #783 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को
  • #1626 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: वामन-भगवान्‌का → वामनभगवान्‌का

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