श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.17.3

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 17 · अथ सप्तदशोऽध्यायः

मनश्चैकाग्रया बुद्ध्या भगवत्यखिलात्मनि।

वासुदेवे समाधाय चचार ह पयोव्रतम्॥ ३

manaścaikāgrayā buddhyā bhagavatyakhilātmani|

vāsudeve samādhāya cacāra ha payovratam|| 3

अर्थ

उसने एकाग्र बुद्धिसे अपने मनको सर्वात्मा भगवान् वासुदेवमें पूर्णरूपसे लगाकर पयोव्रतका अनुष्ठान किया॥ ३॥✎ 769 770 771 772

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (4)
  • #769 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #770 शब्दोंके बीचका स्थान: यज्ञेश्‍वर-भगवान् को → यज्ञेश्‍वर-भगवान्‌को
  • #771 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #772 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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