कल्याणी! यह व्रत भगवान्को सन्तुष्ट करनेवाला है, इसलिये इसका नाम है ‘सर्वयज्ञ’ और ‘सर्वव्रत’। यह समस्त तपस्याओंका सार और मुख्य दान है॥ ६०॥✎ 7681623
अयं वै सर्वयज्ञाख्यः सर्वव्रतमिति स्मृतम्।
तपःसारमिदं भद्रे दानं चेश्वरतर्पणम्॥ ६०
कल्याणी! यह व्रत भगवान्को सन्तुष्ट करनेवाला है, इसलिये इसका नाम है ‘सर्वयज्ञ’ और ‘सर्वव्रत’। यह समस्त तपस्याओंका सार और मुख्य दान है॥ ६०॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.16.60 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 984) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/16/60/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)