श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.16.38

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

एतैर्मन्त्रैर्हृषीकेशमावाहनपुरस्कृतम् ।

अर्चयेच्छ्रद्धया युक्तः पाद्योपस्पर्शनादिभिः॥ ३८

etairmantrairhṛṣīkeśamāvāhanapuraskṛtam |

arcayecchraddhayā yuktaḥ pādyopasparśanādibhiḥ|| 38

अर्थ

प्रिये! भगवान् हृषीकेशका आवाहन पहले ही कर ले। फिर इन मन्त्रोंके द्वारा पाद्य, आचमन आदिके साथ श्रद्धापूर्वक मन लगाकर पूजा करे॥ ३८॥✎ 754 755

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (2)
  • #754 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #755 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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