वे बड़े दीनदयालु हैं। अवश्य ही श्रीहरि तुम्हारी कामनाएँ पूर्ण करेंगे। मेरा यह दृढ़ निश्चय है कि भगवान्की भक्ति कभी व्यर्थ नहीं होती। इसके सिवा कोई दूसरा उपाय नहीं है’॥ २१॥✎ 749
स विधास्यति ते कामान्हरिर्दीनानुकम्पनः।
अमोघा भगवद्भक्तिर्नेतरेति मतिर्मम॥ २१
वे बड़े दीनदयालु हैं। अवश्य ही श्रीहरि तुम्हारी कामनाएँ पूर्ण करेंगे। मेरा यह दृढ़ निश्चय है कि भगवान्की भक्ति कभी व्यर्थ नहीं होती। इसके सिवा कोई दूसरा उपाय नहीं है’॥ २१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.16.21 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 980) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/16/21/