श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.16.20

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 16 · अथ षोडशोऽध्यायः

उपतिष्ठस्व पुरुषं भगवन्तं जनार्दनम्।

सर्वभूतगुहावासं वासुदेवं जगद‍्गुरुम्॥ २०

upatiṣṭhasva puruṣaṃ bhagavantaṃ janārdanam|

sarvabhūtaguhāvāsaṃ vāsudevaṃ jagadgurum|| 20

अर्थ

प्रिये! तुम सम्पूर्ण प्राणियोंके हृदयमें विराजमान, अपने भक्तोंके दुःख मिटानेवाले जगद‍्गुरु भगवान् वासुदेवकी आराधना करो॥ २०॥

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