श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.15.36

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

बुभुजे च श्रियं स्वृद्धां द्विजदेवोपलम्भिताम्।

कृतकृत्यमिवात्मानं मन्यमानो महामनाः॥ ३६

bubhuje ca śriyaṃ svṛddhāṃ dvijadevopalambhitām|

kṛtakṛtyamivātmānaṃ manyamāno mahāmanāḥ|| 36

अर्थ

ब्राह्मण-देवताओंकी कृपासे प्राप्त समृद्ध राज्यलक्ष्मीका वे बड़ी उदारतासे उपभोग करने लगे और अपनेको कृतकृत्य-सा मानने लगे॥ ३६॥✎ 1622

इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायामष्टमस्कन्धे पञ्चदशोऽध्यायः॥ १५॥

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #1622 पंक्तिके अन्तका योजक-चिह्न: राज्य-लक्ष्मीका → राज्यलक्ष्मीका

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