बुभुजे च श्रियं स्वृद्धां द्विजदेवोपलम्भिताम्।
कृतकृत्यमिवात्मानं मन्यमानो महामनाः॥ ३६
ब्राह्मण-देवताओंकी कृपासे प्राप्त समृद्ध राज्यलक्ष्मीका वे बड़ी उदारतासे उपभोग करने लगे और अपनेको कृतकृत्य-सा मानने लगे॥ ३६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.15.36 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 978) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/15/36/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)