श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.15.31

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 15 · अथ पञ्चदशोऽध्यायः

एष विप्रबलोदर्कः सम्प्रत्यूर्जितविक्रमः।

तेषामेवा२पमानेन सानुबन्धो विनङ्क्ष्यति॥ ३१

eṣa viprabalodarkaḥ sampratyūrjitavikramaḥ|

teṣāmevāpamānena sānubandho vinaṅkṣyati|| 31

अर्थ

इस समय ब्राह्मणोंके तेजसे बलिकी उत्तरोत्तर वृद्धि हो रही है। उसकी शक्ति बहुत बढ़ गयी है। जब यह उन्हीं ब्राह्मणोंका तिरस्कार करेगा, तब अपने परिवार-परिकरके साथ नष्ट हो जायगा’॥ ३१॥✎ 747

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—मेवावमा०।

     

    (मुद्रित पृष्ठ 977)
इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #747 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् को → भगवान्‌को

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