जैसे हाथी हथिनीका आलिंगन करता है, वैसे ही भगवान् शंकरने उसका आलिंगन किया। वह इधर-उधर खिसककर छुड़ानेकी चेष्टा करने लगी, इसी छीना-झपटीमें उसके सिरके बाल बिखर गये॥ २९॥✎ 734735736737738
सोपगूढा भगवता करिणा करिणी यथा।
इतस्ततः प्रसर्पन्ती विप्रकीर्णशिरोरुहा॥ २९
जैसे हाथी हथिनीका आलिंगन करता है, वैसे ही भगवान् शंकरने उसका आलिंगन किया। वह इधर-उधर खिसककर छुड़ानेकी चेष्टा करने लगी, इसी छीना-झपटीमें उसके सिरके बाल बिखर गये॥ २९॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.12.29 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 967) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/12/29/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (5)