श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.12.29

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

सोपगूढा भगवता करिणा करिणी यथा।

इतस्ततः प्रसर्पन्ती विप्रकीर्णशिरोरुहा॥ २९

sopagūḍhā bhagavatā kariṇā kariṇī yathā|

itastataḥ prasarpantī viprakīrṇaśiroruhā|| 29

अर्थ

जैसे हाथी हथिनीका आलिंगन करता है, वैसे ही भगवान् शंकरने उसका आलिंगन किया। वह इधर-उधर खिसककर छुड़ानेकी चेष्टा करने लगी, इसी छीना-झपटीमें उसके सिरके बाल बिखर गये॥ २९॥✎ 734 735 736 737 738

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (5)
  • #734 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् ने → भगवान्‌ने
  • #735 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #736 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #737 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की
  • #738 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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