उन्होंने अत्यन्त वेगसे उसका पीछा करके पीछेसे उसका जूड़ा पकड़ लिया और उसकी इच्छा न होनेपर भी उसे दोनों भुजाओंमें भरकर हृदयसे लगा लिया॥ २८॥
सोऽनुव्रज्यातिवेगेन गृहीत्वानिच्छतीं स्त्रियम्।
केशबन्ध उपानीय बाहुभ्यां परिषस्वजे॥ २८
उन्होंने अत्यन्त वेगसे उसका पीछा करके पीछेसे उसका जूड़ा पकड़ लिया और उसकी इच्छा न होनेपर भी उसे दोनों भुजाओंमें भरकर हृदयसे लगा लिया॥ २८॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.12.28 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 966) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/12/28/