श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.12.23

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 12 · अथ द्वादशोऽध्यायः

तस्याः कराग्रात् स तु कन्दुको यदा

गतो विदूरं तमनुव्रजत्स्त्रियाः।

वासः ससूत्रं लघु मारुतोऽहरद्

भवस्य देवस्य किलानुपश्यतः॥ २३

tasyāḥ karāgrāt sa tu kanduko yadā

gato vidūraṃ tamanuvrajatstriyāḥ|

vāsaḥ sasūtraṃ laghu māruto'harad

bhavasya devasya kilānupaśyataḥ|| 23

अर्थ

एक बार मोहिनीके हाथसे उछलकर गेंद थोड़ी दूर चला गया। वह भी उसीके पीछे दौड़ी। उसी समय शंकरजीके देखते-देखते वायुने उसकी झीनी-सी साड़ी करधनीके साथ ही उड़ा ली॥ २३॥

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