कीर्तिर्जयोऽजयो मृत्युः सर्वेषां स्युरनुक्रमात्॥ ७
saṅgrāme vartamānānāṃ kālacoditakarmaṇām|
kīrtirjayo'jayo mṛtyuḥ sarveṣāṃ syuranukramāt|| 7
अर्थ
बलिने कहा—इन्द्र! जो लोग कालशक्तिकी प्रेरणासे अपने कर्मके अनुसार युद्ध करते हैं—उन्हें जीत या हार, यश या अपयश अथवा मृत्यु मिलती ही है॥ ७॥
सङ्ग्रामे वर्तमानानां कालचोदितकर्मणाम्।
कीर्तिर्जयोऽजयो मृत्युः सर्वेषां स्युरनुक्रमात्॥ ७
बलिने कहा—इन्द्र! जो लोग कालशक्तिकी प्रेरणासे अपने कर्मके अनुसार युद्ध करते हैं—उन्हें जीत या हार, यश या अपयश अथवा मृत्यु मिलती ही है॥ ७॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.11.7 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 958) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/11/7/