जो मूर्ख मायाके द्वारा स्वर्गपर अधिकार करना चाहते हैं और उसको लाँघकर ऊपरके लोकोंमें भी धाक जमाना चाहते हैं—उन लुटेरे मूर्खोंको मैं उनके पहले स्थानसे भी नीचे पटक देता हूँ॥ ५॥
आरुरुक्षन्ति मायाभिरुत्सिसृप्सन्ति ये दिवम्।
तान्दस्यून्विधुनोम्यज्ञान्पूर्वस्माच्च पदादधः॥ ५
जो मूर्ख मायाके द्वारा स्वर्गपर अधिकार करना चाहते हैं और उसको लाँघकर ऊपरके लोकोंमें भी धाक जमाना चाहते हैं—उन लुटेरे मूर्खोंको मैं उनके पहले स्थानसे भी नीचे पटक देता हूँ॥ ५॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.11.5 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 958) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/11/5/