श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.11.44

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

नारद उवाच

भवद्भिरमृतं प्राप्तं नारायणभुजाश्रयैः।

श्रिया समेधिताः सर्व उपारमत विग्रहात्॥ ४४

bhavadbhiramṛtaṃ prāptaṃ nārāyaṇabhujāśrayaiḥ|

śriyā samedhitāḥ sarva upāramata vigrahāt|| 44

अर्थ

नारदजीने कहा—देवताओ! भगवान्‌की भुजाओंकी छत्रछायामें रहकर आपलोगोंने अमृत प्राप्त कर लिया है और लक्ष्मीजीने भी अपनी कृपा-कोरसे आपकी अभिवृद्धि की है, इसलिये आपलोग अब लड़ाई बंद कर दें॥ ४४॥✎ 731

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #731 शब्दोंके बीचका स्थान: भगवान् की → भगवान्‌की

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