श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.11.17

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

तस्य तत् पूजयन् कर्म यन्तुर्दानवसत्तमः।

शूलेन ज्वलता तं तु स्मयमानोऽहनन्मृधे॥ १७

tasya tat pūjayan karma yanturdānavasattamaḥ|

śūlena jvalatā taṃ tu smayamāno'hananmṛdhe|| 17

अर्थ

दानवश्रेष्ठ जम्भने रणभूमिमें मातलिके इस कामकी बड़ी प्रशंसा की और मुसकराकर चमकता हुआ त्रिशूल उसके ऊपर चलाया॥ १७॥

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