श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.11.15

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 11 · अथैकादशोऽध्यायः

गदाप्रहारव्यथितो भृशं विह्वलितो गजः।

जानुभ्यां धरणीं स्पृष्ट्वा कश्मलं२ परमं ययौ॥ १५

gadāprahāravyathito bhṛśaṃ vihvalito gajaḥ|

jānubhyāṃ dharaṇīṃ spṛṣṭvā kaśmalaṃ paramaṃ yayau|| 15

अर्थ

गदाकी चोटसे ऐरावतको बड़ी पीड़ा हुई, उसने व्याकुलतासे घुटने टेक दिये और फिर मूर्च्छित हो गया!॥ १५॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—लं च परं ययौ।

    (मुद्रित पृष्ठ 959)

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