dhyātaḥ prādurabhūt tatra bhagavānviśvabhāvanaḥ|| 53
अर्थ
परीक्षित्! इन्द्र आदि देवताओंने उनकी मायाका प्रतीकार करनेके लिये बहुत कुछ सोचा-विचारा, परन्तु उन्हें कुछ न सूझा। तब उन्होंने विश्वके जीवनदाता भगवान्का ध्यान किया और ध्यान करते ही वे वहीं प्रकट हो गये॥ ५३॥✎ 725
न तत्प्रतिविधिं यत्र विदुरिन्द्रादयो नृप।
ध्यातः प्रादुरभूत् तत्र भगवान्विश्वभावनः॥ ५३
परीक्षित्! इन्द्र आदि देवताओंने उनकी मायाका प्रतीकार करनेके लिये बहुत कुछ सोचा-विचारा, परन्तु उन्हें कुछ न सूझा। तब उन्होंने विश्वके जीवनदाता भगवान्का ध्यान किया और ध्यान करते ही वे वहीं प्रकट हो गये॥ ५३॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.10.53 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 956) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/10/53/