परीक्षित्! रणभूमिमें दैत्योंके सेनापति विरोचनपुत्र बलि मय दानवके बनाये हुए वैहायस नामक विमानपर सवार हुए। वह विमान चलानेवालेकी जहाँ इच्छा होती थी, वहीं चला जाता था॥ १६॥
वैरोचनो बलिः संख्ये सोऽसुराणां चमूपतिः।
यानं वैहायसं नाम कामगं मयनिर्मितम्॥ १६
परीक्षित्! रणभूमिमें दैत्योंके सेनापति विरोचनपुत्र बलि मय दानवके बनाये हुए वैहायस नामक विमानपर सवार हुए। वह विमान चलानेवालेकी जहाँ इच्छा होती थी, वहीं चला जाता था॥ १६॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.10.16 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 952) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/10/16/