श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.10.12

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

अन्ये जलस्थलखगैः सत्त्वैर्विकृतविग्रहैः।

सेनयोरुभयो राजन्विविशुस्तेऽग्रतोऽग्रतः॥ १२

anye jalasthalakhagaiḥ sattvairvikṛtavigrahaiḥ|

senayorubhayo rājanviviśuste'grato'grataḥ|| 12

अर्थ

इस प्रकार जल, स्थल एवं आकाशमें रहनेवाले तथा देखनेमें भयंकर शरीरवाले बहुत-से प्राणियोंपर चढ़कर कई दैत्य दोनों सेनाओंमें आगे-आगे घुस गये॥ १२॥

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