श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 8.10.11

अष्टम स्कन्ध · अध्याय 10 · अथ दशमोऽध्यायः

शिवाभिराखुभिः केचित् कृकलासैः श२शैर्नरैः।

बस्तैरेके३ कृष्णसारैर्हंसैरन्ये च सूकरैः॥ ११

śivābhirākhubhiḥ kecit kṛkalāsaiḥ śaśairnaraiḥ|

bastaireke kṛṣṇasārairhaṃsairanye ca sūkaraiḥ|| 11

अर्थ

किसी-किसीने सियारिन, चूहे, गिरगिट और खरहोंपर ही सवारी कर ली थी तो बहुत-से मनुष्य, बकरे, कृष्णसार मृग, हंस और सूअरोंपर चढ़े थे॥ ११॥

टिप्पणियाँ

  1. २

    प्रा० पा०—नरैः खगैः।

    (मुद्रित पृष्ठ 952)
  2. ३

    प्रा० पा०—मृगैरन्ये।

    (मुद्रित पृष्ठ 952)

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