॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 8.1.9
मनुरुवाच
yena cetayate viśvaṃ viśvaṃ cetayate na yam|
yo jāgarti śayāne'sminnāyaṃ taṃ veda veda saḥ|| 9
अर्थ
मनुजी कहा करते थे—जिनकी चेतनाके स्पर्शमात्रसे यह विश्व चेतन हो जाता है, किन्तु यह विश्व जिन्हें चेतनाका दान नहीं कर सकता; जो इसके सो जानेपर प्रलयमें भी जागते रहते हैं, जिनको यह नहीं जान सकता, परन्तु जो इसे जानते हैं—वही परमात्मा हैं॥ ९॥
टिप्पणियाँ
- २
प्राचीन प्रतिमें ‘येन चेतयते विश्वं...’ इस पूर्वार्धके स्थानपर ‘वासुदेवो वसत्येष सर्वदेहेष्वनन्यदृक्’ ऐसा पाठ है।
- ३
प्रा० पा०—मेधसा।