राजा परीक्षित्ने पूछा—मुनिवर! हम आपसे यह सुनना चाहते हैं कि भगवान्ने गजेन्द्रको ग्राहके फंदेसे कैसे छुड़ाया था॥ ३१॥✎ 655
बादरायण एतत् ते श्रोतुमिच्छामहे वयम्।
हरिर्यथा गजपतिं ग्राहग्रस्तममूमुचत्॥ ३१
राजा परीक्षित्ने पूछा—मुनिवर! हम आपसे यह सुनना चाहते हैं कि भगवान्ने गजेन्द्रको ग्राहके फंदेसे कैसे छुड़ाया था॥ ३१॥
श्रीमद्भागवत महापुराण 8.1.31 · गीताप्रेस, गोरखपुर (प्रथम खण्ड, पृष्ठ 909) · https://371ace2f.srimad-bhagavatam.pages.dev/8/1/31/इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)