॥ श्रीहरिः ॥
श्लोक 7.9.38
इत्थं नृतिर्यगृषिदेवझषावतारै-
र्लोकान् विभावयसि हंसि जगत्प्रतीपान्।
धर्मं महापुरुष पासि युगानुवृत्तं
छन्नः कलौ यदभवस्त्रियुगोऽथ स त्वम्॥ ३८
itthaṃ nṛtiryagṛṣidevajhaṣāvatārai-
rlokān vibhāvayasi haṃsi jagatpratīpān|
dharmaṃ mahāpuruṣa pāsi yugānuvṛttaṃ
channaḥ kalau yadabhavastriyugo'tha sa tvam|| 38
अर्थ
पुरुषोत्तम! इस प्रकार आप मनुष्य, पशु-पक्षी, ऋषि, देवता और मत्स्य आदि अवतार लेकर लोकोंका पालन तथा विश्वके द्रोहियोंका संहार करते हैं। इन अवतारोंके द्वारा आप प्रत्येक युगमें उसके धर्मोंकी रक्षा करते हैं। कलियुगमें आप छिपकर गुप्तरूपसे ही रहते हैं, इसीलिये आपका एक नाम ‘त्रियुग’ भी है॥ ३८॥✎ 622