श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
⌕

॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.9.3

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 9 · अथ नवमोऽध्यायः

प्रह्रादं प्रेषयामास ब्रह्मावस्थितमन्तिके।

तात प्रशमयोपेहि स्वपित्रे कुपितं प्रभुम्॥ ३

prahrādaṃ preṣayāmāsa brahmāvasthitamantike|

tāta praśamayopehi svapitre kupitaṃ prabhum|| 3

अर्थ

तब ब्रह्माजीने अपने पास ही खड़े प्रह्लादको यह कहकर भेजा कि ‘बेटा! तुम्हारे पितापर ही तो भगवान् कुपित हुए थे। अब तुम्हीं उनके पास जाकर उन्हें शान्त करो’॥ ३॥✎ 618

इस श्लोक और इसके अर्थमें की गयी शुद्धियाँ (1)
  • #618 शब्दोंके बीचका स्थान: नृसिंहभगवान् ने → नृसिंहभगवान्‌ने

पढ़नेकी विधि

अक्षरका आकार
सामान्य
अध्यायमें क्या दिखे
रोमन लिप्यन्तरण (IAST)
पंक्तियोंके बीच
रंग
सहायता

ये विकल्प केवल इसी ब्राउज़रमें रहते हैं; कहीं भेजे नहीं जाते। कुंजियाँ: ?

↑ ↓ चुनें · Enter खोलें · Esc बन्द

कुंजियाँ

←→
पिछला या अगला पृष्ठ (श्लोक, या अध्याय)
/
खोज
CtrlK
किसी अध्याय या श्लोकपर सीधे जाएँ (Mac: ⌘ K)
AltA
पढ़नेकी विधि
?
यह सूची
Esc
खुली सूची बन्द करें