श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.8.6

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

हे दुर्विनीत मन्दात्मन्कुलभेदकराधम।

स्तब्धं मच्छासनोद्धूतं नेष्ये त्वाद्य यमक्षयम्॥ ६

he durvinīta mandātmankulabhedakarādhama|

stabdhaṃ macchāsanoddhūtaṃ neṣye tvādya yamakṣayam|| 6

अर्थ

‘मूर्ख! तू बड़ा उद्दण्ड हो गया है। स्वयं तो नीच है ही, अब हमारे कुलके और बालकोंको भी फोड़ना चाहता है! तूने बड़ी ढिठाईसे मेरी आज्ञाका उल्लंघन किया है। आज ही तुझे यमराजके घर भेजकर इसका फल चखाता हूँ॥ ६॥

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