श्रीमद्भागवत महापुराणगीताप्रेस, गोरखपुर — मुखपृष्ठ
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॥ श्रीहरिः ॥

श्लोक 7.8.33

सप्तम स्कन्ध · अध्याय 8 · अथाष्टमोऽध्यायः

द्यौस्तत्सटोत्क्षिप्तविमानसङ्कुला

प्रोत्सर्पत क्ष्मा च पदातिपीडिता।

शैलाः समुत्पेतुरमुष्य रंहसा

तत्तेजसा खं ककुभो न रेजिरे॥ ३३

dyaustatsaṭotkṣiptavimānasaṅkulā

protsarpata kṣmā ca padātipīḍitā|

śailāḥ samutpeturamuṣya raṃhasā

tattejasā khaṃ kakubho na rejire|| 33

अर्थ

उनके गरदनके बालोंसे टकराकर देवताओंके विमान अस्त-व्यस्त हो गये। स्वर्ग डगमगा गया। उनके पैरोंकी धमकसे भूकम्प आ गया, वेगसे पर्वत उड़ने लगे और उनके तेजकी चकाचौंधसे आकाश तथा दिशाओंका दीखना बंद हो गया॥ ३३॥

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